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कृषि वित्तपोषण, भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण आवश्यकताएं; इन दो क्षेत्रों से किसानों को फायदा हो सकता है

कृषि, निस्संदेह भारतीय अर्थव्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। कृषि-वित्तपोषण और फसलों का भंडारण यानी वेयरहाउसिंग भारत में कटाई के बाद की कृषि की दो नींव हैं।

फसलों के भंडारण के बुनियादी ढांचे और वैज्ञानिक तरीकों की कमी से संग्रहीत फसलों की गुणवत्ता और मात्रा में कमी आती है। भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भंडारित फसलों का लगभग 10% जो कि 1 लाख करोड़ रुपए है, भारत में भंडारण की अपर्याप्त सुविधाओं और गैर-वैज्ञानिक तरीकों के कारण बर्बाद हो रही है। इसका भारत की कृषि अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव है।

कृषि-वित्तपोषण में विभिन्न प्रकार की वित्तीय सेवाएं शामिल हैं जो विभिन्न कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित हैं। यह वित्त पोषण किसानों को उनकी कृषि गतिविधियों को करने में मदद करता है। भारत सरकार विभिन्न बैंकों के लिए एक ऋण देने का लक्ष्य निर्धारित करती है, लेकिन कुछ बार वे निर्धारित ऋण लक्ष्य को प्राप्त करने में असफल हो जाते हैं। एक तरफ, बहुत सारे किसान हैं जो इस वित्त पोषण को प्राप्त करने में सक्षम नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप कृषि उत्पादन में कमी आई है और दूसरी तरफ ऐसे बैंक हैं जो सरकार द्वारा निर्धारित ऋण लक्ष्यों को पूरा नहीं कर सके।

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https://www.financialexpress.com/economy/agri-financing-warehousing-key-requirements-for-indian-agri-economy-these-two-sectors-may-benefit-farmers/2178986/